हरियाली तीज कब है हरियाली तीज मुहूर्त: जानें महत्व और इस व्रत के लाभ🙏📿🕉️🔯सावन माह में क्यों झूला झूलना चाहिए🎋🏵️🌸☘️🍀

तीज क्यों मनाते हैं
यह त्यौहार देवी पार्वती को समर्पित है, भगवान शिव के साथ उनके मिलन की याद दिलाता है। देवी पार्वती को सात्विक आनंद और प्रसन्नता के साधकों द्वारा पूजा जाता है। 
तीज के दौरान, देवी पार्वती की पूजा की जाती है। हरियाली तीज से एक दिन पहले सिंजारा के रूप में मनाया जाता है, 
जिसमें महिलाएं हाथों में मेहंदी तीज त्योहार विवाहित महिलाओं के लिए एक महत्वपूर्ण तीज त्योहार विवाहित महिलाओं के लिए एक महत्वपूर्ण त्योहार है, और बहुप्रतीक्षित मानसून त्योहार है। यह भगवान शिव और देवी पार्वती के पवित्र मिलन को मनाने के लिए समर्पित है। हिंदू के अनुसार भगवान शिव और देवी पार्वती के पवित्र मिलन को मनाने के लिए समर्पित है। हिंदू के अनुसार 
हिंदू ग्रंथों के अनुसार, पार्वती भगवान शिव की पहली पत्नी सती का अवतार हैं।

तीज में क्या होता है?
हरियाली तीज त्यौहार भगवान शिव और देवी पार्वती के पुनर्मिलन को याद करने के लिए भी मनाया जाता है, जिस दिन भगवान शिव ने देवी पार्वती को अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया था।
देवी पार्वती ने उपवास किया और कई वर्षों तक जागृत रही और भगवान शिव ने उनके 108 जन्म में उनकी पत्नी के रूप में स्वीकार किया
बाया
बया नव विवाहित महिलाओं की माताओं द्वारा दिया गया एक और पारंपरिक पैकेज है, जो तीज पर व्रत रखते हैं। इसमें आम तौर पर दिलकश फ्राइड स्नैक्स (मैथ्री), ड्राई फ्रूट्स, कपड़े, चूड़ियाँ और जेई शामिल हैं


हरियाली तीज कब है, जानें महत्व और इस व्रत के लाभ
सावन के मौसम में जब हर तरफ हर‍ियाली ही हर‍ियाली होती है यानी क‍ि धरती जब हरी चादर ओढ़ लेती है तब हर‍ियाली तीज का पर्व मनाया जाता है। यह पर्व सावन माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है। इस बार यह तिथि 23 जुलाई 2020 को पड़ रही है। इसमें सुहागिन स्त्रियां निर्जला व्रत रखती हैं। हाथों में मेहंदी, नई चूड़ियां और पैरों में आलता लगाती हैं। इसके अलावा नए वस्त्र पहनकर देवी पार्वती की पूजा-अर्चना करती हैं। आइए एस्‍ट्रॉलजर प्रमोद पांडेय से जानते हैं क‍ि कैसे करनी चाहिए इस व्रत की पूजा-अर्चना और क्‍या है कथा?

तीज पूजा विधान
तीज पूजा प्रक्रिया में निम्नलिखित शामिल हैं।
महिलाओं को सुबह जल्दी उठना चाहिए 
और तिल और आंवले के पाउडर से स्नान करना चाहिए।
उसके ससुराल वालों द्वारा दिए गए नए कपड़े पहनें।
इस व्रत को करने के लिए संकल्प लें, 
ताकि सभी देवी पार्वती और भगवान शिव प्रसन्न हों।
देवी पार्वती को चूड़ी, हल्दी, फूल, मेंहदी, कुमकुम या सिंदूर चढ़ाया जाता है।
विशेष नैवेद्यम या भोग तैयार किया जाता है और दिव्य जोड़े को चढ़ाया जाता है।
पूजा के अंत में तीज कथा का पाठ किया जाता है।
हरियाली तीज मुहूर्त: 
तृतीया तिथि की शुरुआत 22 जुलाई को शाम 07:21 बजे से हो जाएगी और इसकी समाप्ति 23 जुलाई को 05:02 बजे पर होगी। हरियाली तीज का पर्व 23 जुलाई को है इसलिए इस दिन सुबह और शाम में किसी भी समय पूजा की जा सकती है।
ऐसे म‍िला था देवी पार्वती को तप का फल
भोलेनाथ कहते हैं क‍ि हे पार्वती! इस शुक्ल पक्ष की तृतीया को तुमने मेरी आराधना करके जो व्रत किया था। उसी के परिणाम स्वरूप हम दोनों का विवाह संभव हो सका। इस व्रत का महत्‍व यह है कि इस व्रत को पूर्ण निष्ठा से करने वाली प्रत्येक स्त्री को मैं मन वांछित फल देता हूं। भोलेनाथ ने पार्वती जी से कहा कि जो भी स्‍त्री इस व्रत को पूरी श्रद्धा और न‍िष्‍ठा से करेगी उसे तुम्हारी तरह अचल सुहाग की प्राप्ति होगी। मान्‍यता है क‍ि इस कथा को जो भी स्‍त्री पढ़ती या सुनती है वहअखंड सौभाग्‍यवती होती है।

हम सावन माह में क्यों झूला झूलना चाहिए

सावन में झूला झुलेंगे तो मिलेंगे फायदा
सावन के महीने में हरे भरे पेड़ के नीचे झूला डालने की परंपरा महज एक परंपरा ही नहीं हैं। बल्कि ये मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य की दृष्टि से भी बहुत लाभकारी है। झूला झूलने से शरीर का एक व्यायाम तो होता ही है साथ ही ये फेफड़े, हृदय और अन्य अंगों को फायदा पहुंचाता है। अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ.सीपी पॉल का कहना है कि पैरों से दबाव डालकर झोटे लेने पर मांसपेशियों का व्यायाम होता है जिससे मांसपेशियों को मजबूती मिलती है।







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